स्नेह बंधन। 💕

इतना प्यार दिया तुमने,
सब आँसू सूख गए
मेरे सब आँसू सूख गए।

क्या रिश्ता है मेरा तुमसे,
कभी न जाना,
पर जबसे माना बस,
तुमको अपना माना।
दिल का होता दिल से रिश्ता
कैसे बता गए।

इतना प्यार दिया तुमने
सब आँसू सूख गए……

मौसम था पतझड़ का
मैं थी मेरे आँसू थे।
ना जानूँ कब तुम आए थे ,
सींचा तुमने पतझड़ इतना
पत्ते हरे हुए।

इतना प्यार दिया तूमने
सब आँसूं सूख गए….

जबसे देखा इस सपने को,
बहुत अलग पाया अपने को।
तुम ही थे बस तुम ही,
जबसे तुम आए थे।
और न कोई भाया था,
बस तुम भाये थे।
दुख लेने सुख देने का
एहसास जगा गए ।

इतना प्यार दिया तूमने
सब आँसूं सूख गए….
मेरे सब आंसू सूख गए। ✍️

In short.,😀😀😀

World is very beaufiful.🌹the distribution of labour in side our body tell us about the justice of God.All our body parts are doing their given work very silently since our birth .इसीलिए कभी कभी अपने शरीर में स्वयं प्रवेश कर heart, lungs, lever , brain,muscles etc से hello कर पूछती हूँ कहीं थके तो नहीं ? फिर उनकी आवाज सुनती हूँ , नहीं इसकी चिंता मत करो,we are very busy in our duty .आप बस माल अंदर अच्छा और समय पर भेजते रहो।” मैं अभी बाहर आकर बढ़िया पकौड़ी और घर का दही फेंट कर कड़ी बनाने की पूरी तैयारी कर आई हूँ ।👍😄✍️

उसका भय ।😲😒

आज facebook में उसे देखा युवा हो गया है । नाम पढ़ते ही वो बच्चा याद आया।सीधा-सादा भोला -भाला सा वो महा राष्ट्रीयन बच्चा । मैं क्लास टीचर थी उसकी । एक कमजोरी थी मुझमें मेरे क्लास के बच्चों को कोई पिटाई लगाता तो जाने क्यों उस टीचर से पिटाई का कारण पूछने पहुँच जाती।
उस दिन सवेरे class attendance के समय देखा था कि एक बच्चा लगातार क्लास में 7-8 दिनों से absent था। उन दिनों बच्चे तांगे में भी आया करते थे। एक बच्चे ने आकर बताया, मैडम वो घर से तो आता है लेकिन फूल बाग में उतर जाता है। फूलबाग हमारे स्कूल से लगभग 1/2 किलोमीटर दूर रहा होगा । बच्चे की बात सुन कर घबरा गई थी मैं ।। उन दिनों मेरे पास Tvs हुआ करती थी । बच्चे की चिंता में बिना Principal sir की permission लिए ही मैं फूलबाग पहुँच गई ।गाड़ी सड़क के किनारे खड़ी कर फूल बाग में उसे ढूंढने लगी ।तभी एक पेड़ के नीचे बैठा वो बच्चा पढ़ रहा था । उसकी पीठ मेरी ओर थी ।मैं धीरे धीरे उसकी ओर बड़ रही थी । मुझे डर था कि कहीं फिर भागने ना लगे । उस बाग के किनारे ही बहुत चलती फिरती सड़क थी। ऐसे में दुर्घटना का डर था । मैं धीरे से उस से बोली, बेटा क्या बात है ? स्कूल में अच्छा नहीं लगता ? वो सुबक सुबक कर रोते हुए बोला maths समझ में नही आता । इसलिए मार पड़ती है। daily एक excercise home work मिलता है ।
मैने स्नेह से उसके सिर में हाथ रखा उसे अपने पास लाई बोला अब कोई तुम्हे नही मारेगा , अगर किसी ने मारा तो मैं पुलिस बुला लूँगी ।
उसने अपना बैग उठाया और मेरी स्कूटी के पीछे बैठ गया ।तब उस बच्चे को अपनी स्कूटी के पीछे बिठा मैं झांसी की रानी का सा एहसास कर रही थी।
स्कूल आते ही मैने उस अध्यापिका को जानकारी दी कि बच्चा maths में punishment के डर से फूल बाग में बैठ जाया करता है एवं छुट्टी में फिर तांगे में घर चला जाता है। आगे से ऐसा न हो ।
हमने बात को ज्यादा बढ़ाया नही ,नहीं तो बच्चे में बुरा असर होता। हर month की 10th को parents teacher मीट होती थी । अक्सर उस बच्चे की बड़ी बहन आया करती थी । वो KRG college की student थी ।उस दिन उसकी आँखों में आंसू थे । हम …बहनों का एक ही भाई है ,आपने बचा लिया उसे । तब लगा स्कूल की मैडम शब्द में भी माँ का सा दम तो होता है ।
बचपन कितना innocent होता है । जरा सी स्नेह में वह असीम ताकतवर सा हो जाता है और जरा सी भय में वो कितना सहम जाता है । daily home work बहुत से बच्चों को कितना डराता है । ✍️

खेल में रेलमपेल ।😀😀😀

राजनीति का खेल ।
देखो राजनीति का खेल।।

नेता के भाषण से,जनता
अंध भक्त बन जाती।
रूखी सूखी खाकर भी
नेता के गुण है गाती ।
हाय कितना महंगा हो गया
डीजल पेट्रोल तेल।

राजनीति का खेल ।
देखो राजनीति का खेल।।

क्या शिक्षा क्या स्वास्थ्य,
सभी हैं पीछे छूट जाते ।
थोड़ी सी विपदा में सारे,
अस्पताल भर जाते ।
इस भीड़ में फँस गए हम भी,
हो गई रेलम पेल।

राजनीति का खेल।
देखो राजनीति का खेल।।

हों जब पास चुनाव तो ,
नेता जनता द्वारे जाते।
मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे के
हैं ये भेद बताते।
इस झगड़े में देखो कितने
भर गए अपने जेल।

राजनीति का खेल।
देखा राजनीति का खेल।।

देश नहीं बिकने दूंगा कह
सारे बेचे जाते।
L. I. C. और रेलवे भी तो,
हाथ से निकले जाते।
दोस्त भाग गए धन उड़ा कर
बैंक हो गए फेल।

राजनीति का खेल देखो
राजनीति का खेल।।

किसी भी दल का नेता हो,
जनता ही चुन कर लाती ।
गर समझ होती नेता से
सारे काम कराती।
हवाई जहाज में घूमे मंत्री
जमीं पर ,
जनता रही है झेल ।

राजनीति का खेल।
देखो राजनीति का खेल।✍️

मन की ।🎈🎈🎈

मन तू मौन नहीं रहता है ।
कितना भी चाहूँ मैं,
तू अपनी ही कहता है ।
इधर उधर डोले है,
जो मन आये बोले है ।
औरों की भी, तो … सुन ।
तू क्यों नहीं सुनता है ?
मन तू मौन नहीं रहता हैं ?

कुछ ठान लिए बैठा है ।
कुछ मान लिए बैठा है ।
इतनी भी मनमानी कैसी ? जो…
इक तरफा तेरी धुन,
क्यों सबको तू धुनता है ?
गुण औरों के भी तो गा …
बस अपनी कही सुनता है ?
मन तू मौन नहीं रहता है ।
कितना भी चाहे
तू क्यों नहीं सुनता है ….
मन तू मौन नही रहता है …। ✍️

कक्का और बाँसुरी- धुन।🙏

आज कृष्ण जन्माष्टमी है । घर में जन्माष्टमी की खूब सजावट और भक्तिमय धूम रहती । रात को मेहंदी भी लगाई जाती । शायद यहां भी नाम का असर था , चक्रधर और राधा ,हमारी मां और पिताजी का नाम । 🙏लगता है घर के एक शांत व्यक्तिव का नाम भी , कृष्ण के नाम से जुड़ता है और वो थे हमारे लालू कक्का (सबसे छोटे चाचा ) । लालू कक्का ।ललित मोहन पांडे ।जब कभी ‘अहम’ भ्रमित करता है तो लालू कक्का की याद आती है । बिल्कुल सीधा साधा व्यक्तित्व । इतने सीधे कि विश्वास नही होता। हर समय मुस्कुराते रहना । भातखण्डे संगीत विश्वविद्यालय से संगीत प्शिक्षण लिया था लालू कक्का ने बांसुरी बजाने का शौक ऐसा कि जहां भी जाते उनकी साईकल के थैले में बाँसुरी अवश्य होती । हम नजरबाग में लालू कक्का के घर में आते ही कहते कक्का बांसुरी बजाइए लालू कक्का बांसुरी की धुन में मग्न हो जाया करते । हम भूल जाते कि कक्का निशातगंज से नजरबाग साईकल से आकर थकते भी होंगे ।अक्सर घर आते ही भाभी कहां हैं पूछते माँ के पैर छूते और जमीन में बिछी दरी में बैठ जाते ।कक्का की बांसुरी की आवाज न जाने क्यों जन्माष्टमी में सुनाई देती है । सोचती हूँ कृष्ण की बांसुरी का सम्बंध हमारे सीधे – सादे लालू कक्का की बांसुरी की धुन से अवश्य रहा होगा । न गीता के किसी उपदेश की आवश्यकता बस एक बाँसुरी और उसकी सम्मोहित करने वाली आवाज़। कितना कठिन कार्य है आदमी का सरल होना ।उन्हें शत शत नमन। 🙏

सभी की जन्माष्टमी की धुन और धूम की शुभकामनाएं एवं बधाई । 🎉🎉🎉✍️

चांद सा ।🌙

वो सबसे जुदा था ,
जो खुद पे फिदा था ।
खुदी में ही उसके
उसका खुदा था ।

स्वयं एक रौनक था,
ऋषि जैसे शौनक था।
वो करता मनमानी था,
मगर एक ज्ञानी था।

जहाँ भी वो जाता था,
मौसम ले आता था ।
गरम हवाओं में ,
बादल सा छाता था ।

वो जब भी गाता था,
मन को लुभाता था ।
रोता हुआ था जो,
उसको हँसाता था ।

उसकी वो कलाएं
थीं सब को लुभाए ।
मुसीबत में पहुंचे
जहां जो बुलाएं।

उसकी वो कलाएं
थीं सब को लुभाए ।
मुसीबत में पहुंचे
जहां जो बुलाएं।

अमावस का दिन था,
वो कुछ अलविदा सा।
हुआ एक दिन गुम
वो इक बुदबुदा सा। ✍️

दीदी जीजा जी । 💔😪

वो खिलखिलाती
तो वो थे मुस्काते।
जरा भी नज़र थे
न उस से हटाते।
वो पल कैसे बीते
जो थे इतने मीठे।
वो उसके दीवाने थे,
थी वो भी दीवानी।
सच मानो सच्ची थी
उसकी कहानी।
जब से गई दूर
उसकी वो छाया
वो भी है गुम सुम
है कंकाल काया ।
पल भर की छाया
जीवन की माया ।
ये लम्हे जो देखे,
मुझे याद आया…
मुझे याद आया….। ✍️

मिल जाओ ना सब ।🇮🇳💖🙏

चाहे बोलो ईश्वर अल्लाह
चाहे बोलो रब,
मानव-धर्म बड़ा है सबसे,
मिल नाओ ना सब।

मैं हिन्दू तू मुस्लिम कह कर,
कब तक बाँटे जाओगे ?
टूट टूट कर बच्चों को कल,
कौन सा पाठ पढ़ाओगे ?

इस मानव -धर्म में देखो
सबकी एक ही आशा
दुख -सुख हंसना- रोना सबकी,
देखो एक ही भाषा

ऊपर वाले को ही कहते,
ईश,अल्लाह और रब।
मानव धर्म बड़ा है सबसे,
मिल जाओ ना सब।

ऊपर वाले की भाषा को

तुम जानोगे कब ?

मानव धर्म बड़ा है सबसे
मिल जाओ ना सब

इक दूजे का दुख बांटो तो,
आधा हो जाता है।
सुख जब बांटो दूजे से तो,
दुगना हो जाता है।

अनुभव के इन भावों को

तुम पहचानोगे कब ?

मानव धर्म बड़ा है सबसे,
मिल जाओ न सब।

संविधान से शक्ति लेकर
प्रेम की डोर बनाओ।
इसी प्रेम की डोरी से
प्रगति-पतंग उड़ाओ।

आनन्द इस उड़ान का देखो,
मिल जाएगा तब।

मानव धर्म बड़ा है सबसे,
मिल जाओ ना सब ।


चाहे बोलो ईश्वर अल्लाह,
चाहे बोलो रब,
मानव- धर्म बड़ा है सबसे,
मिल जाओ ना सब । 🙏✍️


🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

चश्मा ।💖

जबसे  मेरा , चश्मा टूटा ,
हर शब्द लगे   मुझसे  रूठा ।
कहते हैं ये  अब  ढूंढ  हमें,
आंखों पर  इतना गर्व तुझे।
तूने शब्दों को कई बार ,
आंखों से ही बस जोड़ा है ।
आंखों का करके है बखान ,
चश्मे को क्यूँ कर छोड़ा है।

दो दिन  क्या   तुझसे दूर हुआ ,  

पढ़ना कितना  मजबूर हआ ।
उन शब्दों को  मैंने ही तो ,
तेरी आँखों से जोड़ा है।

चश्मे की कमी न सह पाऊँ।
विरहा – पीड़ा  क्या बतलाऊं…
वह जबसे मुझसे जुदा हआ ,
  हर  अक्षर काला  भैंस  हुआ  ।

चश्मा  जब  वापस  पाऊँगी,
मल- मल से उसे दुलारूंगी ।
फिर प्यार से पहनूँगी उसको,
आभार उसे  जतला कर  के, 
शब्द- जलधि में नहालुंगी ।  ✍️

क्यूँ इतना छोटा कर डाला ।😪💝

हे ईश्वर क्यों है यहां भरम
सीमाओं में बांध तुझे,
क्यों इतना छोटा कर डाला।
विश्व व्याप्त तेरी शक्ति को
इसका -उसका कर डाला।

मेरी गीता के समक्ष,
उसकी कुरान झूठी लगती ।
उसके अल्लाह के आगे ,
भगवान भक्ति झूठी लगती।
मानव के इस झूठे प्रपंच ने,
मानवकत्ल ही कर डाला।

हे ईश्वर भ्रम इस मानव ने,
तुझे कितना छोटा कर डाला।

इक गलियों में घूम घूम कर ,
जय श्री राम चिल्लाता है
दूजा भी मस्ज़िद में चढ़ ,
अल्लाह अकबर को बुलाता है ।
जो सर्वशक्ति और सर्व व्याप्त,
उसका बंटवारा कर डाला ।

हे ईश्वर मानव  ने भ्रमित कर
तुझे इतना छोटा कर डाला
मानव के इस झूठे प्रपंच ने,
मानव का कत्ल ही कर डाला।

जो है सर्व शक्ति  सर्व व्याप्त ,
उसका बंटवारा कर डाला। ✍️

🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

आनंद ।🕉️🌈🎉🎈💖

जब साथ न दे ये तन,
घबराए मन,
ध्यान लगा उसका
और बैठ संग आनंद के ।

जब दिल टूटे,
कोई अपना छूटे,
अपने से ही
हो जाए अन-बन ।
तब मन में रमा उसको
और बैठ संग आनंद के।

जब यादों के बादल छाएँ,
बीते हुए क्षण से,
मिल ना पाएं।
तब यादों का संग्रह कर
और बैठ संग आनंद के।

जब घर के आँगन,
खुशियां आएं ।
नित दिन को ही सब ,
पर्व मनाएं।
तब पुण्यागिरी के दर्शन कर
और बैठ संग आनंद के।

आनंद में सेवा भाव भरा,
आनंद से ही तो सब हरा भरा।
अनगिनत आशीष संग लिए,
मंदिर में तू इक घण्टी बजा
और बैठ संग आनंद के।✍️

भाई का जन्मदिन ।🎉🎈🎈🎈

कोरोना जब हुआ था घर में
नानी याद आई थी।
तब भाइयों की ताकत ने मिल
ज्योति एक जलाई थी।
बीमारी का peak month था,
पर संग आशावान
सुदीप था।
अपनी बीमारी से उठ कर…
हॉस्पिटल की दौड़ लगाई।

सिंगापुर के फ़ोन ने भी तो
अपना असर दिखाया था…
60 था Oxygen level
98 ले आया था ।

अक्सर राखी की ये ताकत
अपना रंग दिखाती है,
इसीलिए हर आफत में…
भाइयों की याद आती है।

जन्मदिन है भाई तुम्हारा
कितना अनुपम दिन ये प्यारा।
हर पल आने वाली खुशियाँ
तुम जैसी ही निराली हों…..
आंगन में यूँ ही चहके चिड़ियां
घासों में हरियाली हो। ✍️

गमले में एक फूल ।💕


मेरे गमले में फूल खिला,
रंग हरा लाल पीला ‘मिला’।
कुदरत की ये कला
अद्भुत रूप दिखाती है ।
जितने पास रहो प्रकृति के,
आनंद उतना दे जाती है ।✍️

20 जुलाई💕

बिटिया मेरा दर्द मूक मैं किस से बोलूं रे।
सुनने वाले भी गए ऊब ,मैं किस से बोलूं रे।
बीते जाते हैं दिन जितने मैं उतना मरती हूँ।
जिसदिन हँसी मैं जितना बेटी, रात को रोती हूँ।
अपने रोने की बात ओ बिटिया, किस से बोलूं रे।
सुन ने वाले भी गए ऊब मैं किस से बोलूं रे ।
बेटी थी या तू देवी थी, था घर में माँ का वास मेरे।
देवी ने सहा क्यों इतना दुख, मेरे घर से जाने में।
मैं मन में रोलूँ रे …बिटिया मेरा दर्द मूक ……
दुनियां ये आना जाना है पर माँ का मन कब माना है।
जन्मदिवस में तेरे अब भी, राह निहारूं रे…..✍️

इतना तो बतला मुझे कोरोना।🤔

इतना प्यारा प्यारा रिश्ता, क्या इसी जन्म में मिलता होगा ।यहाँ रंगीले फूल खिले हैं , क्या वहां भी कोई खिलता होगा।

मन चाही बातें करते हम, सँग में हंसते , सँग रोते हम।
दुख सुख में सबका मिल जाना जीवन बनता एक तराना।
यहां ये प्यारे रिश्ते देखे ,क्या वहां भी कोई रिश्ता होगा…

धरती अम्बर सागर गहरा, कभी है शाम कभी सवेरा…
पेड़ों की हरियाली सुन्दर, है उन पर पंछी का बसेरा ….
प्रकृति का आनंद अनौखा यहाँ जो है क्या वहां भी होगा…

माँ का सर पर हाथ फेरना,अपनी उम्र का बड़ा सा हिस्सा पिता का बच्चों को दे देना।
नाना नानी दादा दादी चाचा चाची ननद और भाभी ,
हैं कितने प्यारे बंधन में।
‘श्रवण’ यहाँ अब भी घर घर में।
हर बच्चा है प्रभु का आशीष , हर बेटी देवी है यहाँ
भाई का बहनों से रिश्ता जो यहां पे है क्या वहाँ भी होगा….
मधुर मधुर यादों सँग जीवन यहां तो है क्या वहाँ भी होगा..
ले जा सँग तू मुझे कोरोना ,
पर इतना बतला दे मुझको ,
जो यहाँ पे है क्या वहां भी होगा…✍️

वही तो मेरे राम हैं।🙏

अपने भक्तों का झुंड लिए
गलियों गलियों में जाते हो।
माथे में टीका लगा के तुम,
भगवा झंडा फहराते हो।
भ्राता लिंचिंग करके तुमने ?
रक्त रंजित है नाम किया।
राम मेरा बदनाम किया।
हर मन-मन्दिर में राम मेरे,
तुम भव्य महल बनाते हो ?
ये जनता कितनी भोली है।
मेरे राम के नाम से डोली है।
कब भरम ये इसका टूटेगा।
वो वोटों से राम को लूटेगा।
खुद अपना आराम लिया।
और राम मेरा बदनाम किया।
खलनायक श्रेणी के
नेता तुम , तुम राम नाम को क्या जानो
सदियों से दिल में राम बसे
वो राम को तुम क्या पहचानो।
गद्दी में तुम्हारे राम छुपे
वो राम तुम्हारे झूठे है।
बहुत दूर तुमसे है राम
मेरे राम तो बहुत अनूठे हैं।

शबरी के हैं ।
बापू के हैं जो,
वही तो मेरे राम हैं।
वो दिल में बसे
मन मन्दिर में ,
जो हैं कण कण ,
वही तो मेरे राम हैं।
जो दीपावली में
अली के संग
जो प्रेम भाव का
भरे है रंग।
जो जन्म में हैं
और मरण में भी,
जो रचना में और
क्षरण में भी,
वही तो मेरे राम हैं।
जो सहने की शक्ति रखते
और त्याग में भी भक्ति रखते ।
जो प्रेम में हैं
अनुराग में हैं,
वही तो मेरे राम हैं।
हर धर्मों में
हर धर्मी में
हर मानव में
हर कर्मी में
जो दया भाव
और मर्यादित,
वही तो मेरे राम है…
वही तो मेरे राम है….वही तो मेरे राम हैं।🙏✍️

माया महा ठगनि हम जानी ।😪😀

माया महा ठगनि हम जानी
दुनिया ये मनमानी।
जब बेटी की उठी थी डोली
माँ रोते बापू से बोली,
क्यों बहे तुम्हारीआंखों से,
इतना झर झर पानी
अब तो चित भी उसकी
पट भी उसकी।
जैसे , घर की मैं पटरानी,
बिटिया भी होगी
उस घर की महारानी।
सुन कर
बातें बिटिया की माँ की,
बापू को हुई हैरानी ।
थोड़ा सा फिर वो मुस्काए…
देखा 🙄
बिटिया की माँ को …
बोले ,
” . ये माँ महा ठगनि हम जानी।”😀✍️

नोट-चित-पट (माइका-ससुराल)

वो फिर याद आई ।🌹🙏

सवेरे सवेरे महिला दिवस की बधाई का msssage मिला।माँ सामने आ खड़ी हुईं हैं उसी कतार में जहाँ साहसी और व्यवस्थित महिलाओं के दर्शन पाती हूँ । वो एक घरेलू महिला थीं लेकिन उनमें कभी इंदिरा गांधी कभी लक्ष्मी बाई कभी मदर टेरेसा दिखाई देतीं। वो गुलशन नन्दा के उपन्यास का जमाना था लेकिन माँ शिवानी के नावेल पढ़ा करतीं। ,कृष्ण कली, अतिथि उनको पढ़ते देखा था । महादेवी वर्मा सुभद्रा कुमारी चौहान की कविताएं उनको प्रिय थीं। उनकी डायरी के कुछ पेज पढ़े हैं जिसमें महीने के आखिरी दिनों में प्रेस वाले से लेकर दूध दहीं अखबार का हिसाब लिखा देखा है। एक दो पन्नों में हम बेटियों को कुछ अच्छे तौर तरीके के विचार भी दिए हैं।
उनकी पसंद की कविता, माँ कह एक कहानी बेटा समझ लिया क्या तूने मुझको अपनी नानी ……कहती है मुझसे ये चेटी तू मेरी नानी की बेटी कह माँ लेटी ही लेटी राजा था या रानी….कह माँ एक कहानी….। वो जब भी यह कविता कहतीं हम भाव विभोर हो जाते।
माँ को याद करते हुए छोटी बहिन ने कहा था सेंट जोंस कॉलेज जाते समय वो हमारा लंच बॉक्स रखने से पहले उस रिक्शे वाले को खिलातीं जो कॉलेज ले जाता था। भले ही कॉलेज को देर हो रही होती। माँ घर में काम करने वाली आशु से बहुत स्नेह रखतीं और उसके लिए भी हर बार कुछ खरीद के लातीं जब घर के बच्चों के लिए कुछ आता। उसके परिवार की भी आवश्यकताओं की पूर्ती करतीं।
माँ के पिता से गुस्से का तरीका बड़ा विशिष्ठ था वो जब भी डैडी से नाराज होतीं तो उनसे बात नहीं करतीं तब डैडी हमसे कहा करते जरा पता लगाओ माँ क्यों नहीं बोल रहीं हैं। दूसरे तीसरे दिन वो नाराज़ी दूर हो जाती ।
माँ अपने माईके में अपने भाई बहनों में सबसे छोटी और विवाह के बाद सबसे बड़ी बहू बनी। उनकी एक अंगुली थोड़ी टेढ़ी सी थी वो बतातीं चाचा को फीस के लिए अंगूठी दे दी थी जब तुम्हारे डैडी को मालूम हुआ तो वे नाराज़ हुए थे चाचाजी पर । उनको बचाते समय ही मेरी अंगुली में लगी थी।बहुत पुरानी बात थी ये तब चाचा छोटे थे।
माँ के लिए डैडी हर वर्ष 2 अक्टूबर को गांधी आश्रम से प्योर सिल्क की साड़ी उपहार लाते जो उन्हें बेहद प्रिय थीं।……..
सवेरे भजन के बाद सर्वा बाधा विनिर मुक्तो धन धान्य सुतान्वितो मंत्र अवश्य कहतीं ।
महिला दिवस बधाई के इस बीच कई मेसेज आ गए हैं।
एक मैसेज में लिखा है,
🙏यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते,रमन्ते तत्र देवता:🙏
(जिस समाज में स्त्रियों का सम्मान होता है वहां दिव्य शक्तियां निवास करती हैं) 🙏सद्गुणों से सम्पन्न नारी सर्वदा सभी रूपों में पूजनीय है🙏
मैं मन्दिर की ओर देखती हूँ साक्षात माँ के दर्शन होते हैं मैं दिया प्रज्वलित कर माँ से कहती हूँ ,माँ महिला दिवस की बधाई । आपकी सभी बेटियां अपनी अपनी सीमाओं में सफल एवम “आनंद” मयी हैं।🌹🙏

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