
कितना अच्छा होता भगवन, तुम थोड़ी शक्ति देते ।
दूजा दिन आते ही हम भी, पहला दिन डिलीट करते ।
वर्षों तक न जाने क्यों,कुछ बातें पीछा करतीं हैं ।
जितना भी आगे बढ़ जाएं, छाया बन कर चलती हैं ।
कुछ अपने संग चलते चलते ,जीवन के थे छन्द हुए ।
मानो उन छन्दों के पन्ने तेज हवा से बन्द हुए।
बस यूँ ही कुछ ऐसे लम्हें, हम भी तो भूला करते।
दूजा दिन आते ही हम भी,पहला दिन डिलीट करते।✍️














